सिद्ध पीठ शिव बगलामुखी मंदिर, ब्रह्मपुरी, सहारनपुर (उत्तर प्रदेश) दस महाविद्याओं में अष्टम महाविद्या माँ बगलामुखी का परम पावन सिद्ध पीठ है। यहाँ माँ बगलामुखी का स्वयंभू स्वरूप विराजमान है जो सैकड़ों वर्षों से भक्तों को शत्रु-स्तम्भन, वाक्-सिद्धि, मुकदमा विजय, काला जादू निवारण एवं हर प्रकार के संकट से मुक्ति प्रदान कर रहा है।
माँ बगलामुखी पीताम्बरा धारिणी हैं। स्वर्ण सिंहासन पर विराजमान, दाहिने हाथ में गदा और बाएँ हाथ से दैत्य की जीभ पकड़े हुए, माँ का यह भयंकर रूप अधर्म, असत्य और दुष्टता का तुरंत स्तम्भन कर देता है। माँ का मूल मंत्र है:
ॐ ह्लीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ॐ स्वाहा ॥
1970 के दशक में संतों को स्वप्न दर्शन हुआ और इस पवित्र स्थल पर माँ बगलामुखी ने स्वयं प्रकट होकर दर्शन दिए। तभी से यह स्थान सिद्ध पीठ के रूप में विख्यात है। माँ के साथ भगवान शिव, माँ दुर्गा, हनुमान जी, राधा-कृष्ण, लक्ष्मी-नारायण, माँ संतोषी, माँ अन्नपूर्णा आदि अनेक देवी-देवताओं के सुंदर विग्रह भी विराजमान हैं।
यहाँ प्रतिदिन प्रातः 5:30 बजे मंगला आरती, दोपहर 12 बजे भोग आरती और सायं 6:30 बजे विश्व प्रसिद्ध संध्या आरती होती है जिसमें सैकड़ों भक्त सम्मिलित होते हैं। नवरात्रि, बगलामुखी जयंती एवं दीपावली पर यहाँ विशाल हवन एवं महोत्सव होते हैं जिनका सीधा प्रसारण यूट्यूब पर भी किया जाता है।
देश-विदेश से आने वाले लाखों भक्तों की मनोकामना माँ बगलामुखी यहाँ शीघ्र पूर्ण करती हैं। माँ के दर्शन मात्र से ही शत्रु भय, मुकदमे का तनाव, व्यापार में रुकावट एवं पारिवारिक क्लेश दूर हो जाते हैं।
रोज पाठ करने से शत्रु स्तम्भन, मुकदमा विजय एवं सर्व कार्य सिद्धि होती है
नित्य पाठ से वाक्सिद्धि, शत्रु-स्तम्भन एवं विजय प्राप्ति